POWER Framework: वैश्विक वैकल्पिक भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने की BRICS की पहल
POWER Framework
नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले BRICS देशों के वित्त मंत्रालयों और केंद्रीय बैंकों के प्रतिनिधियों ने जयपुर में बैठक की। बैठक में वित्तीय सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन और वैकल्पिक सीमा-पार भुगतान तंत्र पर चर्चा की गई।
यह चर्चा चीन द्वारा प्रस्तावित पाँच-बिंदु “POWER” Framework के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण रही। इस पहल में विकासशील देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ (Global South) के हितों के प्रतिनिधित्व में BRICS की भूमिका को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
BRICS की वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों का महत्त्व
1. पारंपरिक वित्तीय नेटवर्क पर निर्भरता कम करना
BRICS देश मौजूदा वैश्विक वित्तीय बुनियादी ढाँचे पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए वैकल्पिक भुगतान तंत्र तलाश रहे हैं।
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने से द्विपक्षीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है।
- वैकल्पिक भुगतान प्लेटफॉर्म विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीलापन प्रदान कर सकते हैं।
- इससे भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय प्रतिबंधों से उत्पन्न जोखिम कम किया जा सकता है।
- उदाहरण: वर्ष 2022 में कुछ रूसी बैंकों को SWIFT नेटवर्क से बाहर किए जाने से स्वतंत्र भुगतान तंत्र के रणनीतिक महत्त्व को रेखांकित किया गया।
2. ग्लोबल साउथ में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना
कई विकासशील देशों को महंगे प्रेषण (Remittance) चैनल, सीमित बैंकिंग कनेक्टिविटी और मध्यस्थ संस्थाओं पर निर्भरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
निम्नलिखित प्रणालियों पर आधारित वैकल्पिक भुगतान तंत्र:
- डिजिटल भुगतान
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC)
- त्वरित भुगतान नेटवर्क
अधिक सुलभ, तेज और किफायती वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
भारत का UPI मॉडल यह दर्शाता है कि इंटरऑपरेबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर घरेलू और सीमा-पार भुगतान को किस प्रकार बदल सकता है।
3. व्यापार और लेन-देन की लागत कम करना
पारंपरिक सीमा-पार भुगतान में कई मध्यस्थ, मुद्रा परिवर्तन और भुगतान निपटान में देरी शामिल होती है।
BRICS के वैकल्पिक भुगतान तंत्र:
- विदेशी मुद्रा रूपांतरण की लागत कम कर सकते हैं।
- भुगतान निपटान को तेज बना सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाले MSMEs को सहायता दे सकते हैं।
- आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार कर सकते हैं।
यह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
4. वैश्विक वित्त में बहुध्रुवीयता को मजबूत करना
विविध और बहु-विकल्पीय वैश्विक भुगतान व्यवस्था अधिक संतुलित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में योगदान दे सकती है।
BRICS देशों का मानना है कि:
- वैश्विक वित्तीय प्रणाली अधिक समावेशी होनी चाहिए।
- विकासशील देशों को वित्तीय प्रशासन में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
- भुगतान बुनियादी ढाँचे को भू-राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
5. डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाना
वैकल्पिक भुगतान प्रणालियाँ निम्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दे सकती हैं:
- डिजिटल व्यापार
- ई-कॉमर्स
- पर्यटन भुगतान
- सीमा-पार प्रेषण
- डिजिटल मुद्राएँ
यह तकनीक-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे व्यापक परिवर्तन के अनुरूप है।
BRICS की वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों से जुड़ी चिंताएँ
1. वैश्विक वित्तीय प्रणाली के विखंडन का जोखिम
अलग-अलग भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र बनाने से सहयोग बढ़ने के बजाय वैश्विक वित्तीय प्रणाली का विखंडन हो सकता है।
- कई प्रतिस्पर्धी प्रणालियाँ जटिलता बढ़ा सकती हैं।
- व्यवसायों को अलग-अलग वित्तीय नेटवर्क के बीच काम करने में कठिनाई हो सकती है।
- वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी कम हो सकती है।
2. चीन के प्रभुत्व की चिंता
अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना एक उद्देश्य हो सकता है, लेकिन किसी अन्य प्रमुख मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता नई कमजोरियाँ पैदा कर सकती है।
- चीन की कई BRICS वित्तीय पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका है।
- डिजिटल युआन के व्यापक उपयोग से भुगतान बुनियादी ढाँचे में चीन का प्रभाव बढ़ सकता है।
- भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने हेतु एक तटस्थ और संतुलित प्रणाली आवश्यक होगी।
3. BRICS सदस्यों के बीच भू-राजनीतिक मतभेद
BRICS एक विविध समूह है और इसके सदस्य देशों के रणनीतिक हित अलग-अलग हैं।
- रूस वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के साधन के रूप में देखता है।
- भारत का अधिक जोर दक्षता, नवाचार और वित्तीय समावेशन पर है।
- अन्य सदस्यों की आर्थिक और वित्तीय प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं।
इसलिए एक साझा भुगतान ढाँचे पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
4. नियामक और संस्थागत चुनौतियाँ
BRICS देशों के बीच निम्न क्षेत्रों में अंतर मौजूद हैं:
- डेटा संरक्षण कानून
- पूंजी नियंत्रण
- मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियम
- मुद्रा प्रबंधन नीतियाँ
इन व्यवस्थाओं में सामंजस्य स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण संस्थागत समन्वय की आवश्यकता होगी।
5. साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के जोखिम
डिजिटल भुगतान नेटवर्क और CBDC नई प्रकार की चुनौतियाँ पैदा कर सकते हैं:
- वित्तीय बुनियादी ढाँचे पर साइबर हमले
- डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
- पूंजी के तेजी से बाहर जाने की संभावना
- आपस में जुड़े सिस्टम में तकनीकी या परिचालन विफलता
इसलिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढाँचा आवश्यक होगा।
आगे की राह
1. प्रतिस्थापन के बजाय इंटरऑपरेबिलिटी पर ध्यान
BRICS को ऐसी प्रणालियाँ विकसित करनी चाहिए जो मौजूदा वैश्विक नेटवर्क की पूरक हों, न कि पूरी तरह अलग व्यवस्था बनाएं।
इसके लिए:
- SWIFT, IMF और BIS जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ अनुकूलता बढ़ाई जाए।
- खुले तकनीकी मानकों को बढ़ावा दिया जाए।
2. क्रमिक और क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण अपनाना
तुरंत एक साझा भुगतान प्रणाली बनाने के बजाय BRICS को शुरुआत निम्न क्षेत्रों से करनी चाहिए:
- द्विपक्षीय व्यापार निपटान
- पर्यटन भुगतान
- प्रेषण कॉरिडोर
- MSME लेन-देन
सफल पायलट परियोजनाओं को बाद में व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है।
3. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना
देशों को निम्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहिए:
- सुरक्षित CBDC प्लेटफॉर्म
- रियल-टाइम भुगतान प्रणाली
- डिजिटल पहचान बुनियादी ढाँचा
- साइबर सुरक्षा तंत्र
भारत का UPI अनुभव बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले डिजिटल भुगतान ढाँचे के लिए एक उपयोगी मॉडल हो सकता है।
4. साझा नियामक मानक विकसित करना
BRICS देशों को निम्न क्षेत्रों में सहयोग करना चाहिए:
- सामंजस्यपूर्ण AML/CFT मानक
- डेटा साझा करने के प्रोटोकॉल
- उपभोक्ता संरक्षण तंत्र
- साइबर सुरक्षा सहयोग
इससे सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी।
5. तटस्थ शासन व्यवस्था सुनिश्चित करना
BRICS भुगतान प्रणाली की सफलता के लिए संस्थागत तटस्थता महत्वपूर्ण होगी।
प्रणाली को निम्न से बचना चाहिए:
- डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता
- युआन का प्रभुत्व
- किसी एक देश का राजनीतिक नियंत्रण
सभी सदस्य देशों की भागीदारी वाली पारदर्शी शासन व्यवस्था प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाएगी।
निष्कर्ष
BRICS की वैकल्पिक भुगतान प्रणालियाँ अधिक समावेशी, लचीली और विविध वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती हैं। इससे लेन-देन की लागत कम करने, डिजिटल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालाँकि, इसका उद्देश्य एक प्रमुख वित्तीय व्यवस्था को हटाकर दूसरी प्रमुख व्यवस्था स्थापित करना नहीं होना चाहिए। वैश्विक भुगतान व्यवस्था का भविष्य सुरक्षित, इंटरऑपरेबल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित प्रणालियों में है, जो वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हुए देशों और व्यवसायों को अधिक विकल्प प्रदान करें।