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भारत के राष्ट्रपति: सूची, शक्तियाँ, कार्य एवं संवैधानिक प्रावधान

By Admin | Sep 14, 2026 | 1 min read

भारत के राष्ट्रपति: सूची, शक्तियाँ, कार्य एवं संवैधानिक प्रावधान

भारत के राष्ट्रपति भारत गणराज्य के संवैधानिक प्रमुख और देश के प्रथम नागरिक होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 में राष्ट्रपति के पद का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति भारतीय संसद का अभिन्न अंग हैं और अनुच्छेद 53 के तहत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। हालांकि, संसदीय शासन प्रणाली के अंतर्गत राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करते हैं, जिसका प्रावधान अनुच्छेद 74 में किया गया है। राष्ट्रपति के पास कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय, न्यायिक, कूटनीतिक तथा आपातकालीन शक्तियाँ होती हैं।

भारत के राष्ट्रपतियों की सूची

26 जनवरी 1950 को भारत के गणराज्य बनने के बाद अब तक भारत में 15 राष्ट्रपति रहे हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे, जबकि द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं और वर्तमान राष्ट्रपति हैं।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1950–1962): वे भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारत के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1962–1967): वे प्रसिद्ध दार्शनिक और शिक्षाविद थे तथा भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने। वे भारत के उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे। उनका जन्मदिन 5 सितंबर भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

डॉ. जाकिर हुसैन (1967–1969): वे भारत के तीसरे राष्ट्रपति और इस पद पर आसीन होने वाले पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे। उनका निधन राष्ट्रपति पद पर रहते हुए हुआ।

वराहगिरि वेंकट गिरि (1969–1974): वी. वी. गिरि राष्ट्रपति बनने से पहले कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में भी कार्य कर चुके थे। वे स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रपति निर्वाचित होने वाले पहले व्यक्ति माने जाते हैं।

डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद (1974–1977): वे भारत के पांचवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ।

नीलम संजीव रेड्डी (1977–1982): वे भारत के छठे राष्ट्रपति थे और निर्विरोध निर्वाचित होने वाले पहले राष्ट्रपति थे। वे लोकसभा के अध्यक्ष भी रह चुके थे।

ज्ञानी जैल सिंह (1982–1987): वे भारत के सातवें राष्ट्रपति और देश के पहले सिख राष्ट्रपति थे।

आर. वेंकटरमण (1987–1992): वे भारत के आठवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पहले वे उपराष्ट्रपति और केंद्रीय वित्त मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1992–1997): वे भारत के नौवें राष्ट्रपति थे। वे उपराष्ट्रपति तथा कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके थे।

के. आर. नारायणन (1997–2002): वे भारत के दसवें राष्ट्रपति थे और व्यापक रूप से भारत के प्रथम दलित राष्ट्रपति के रूप में जाने जाते हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वे उपराष्ट्रपति और राजनयिक के रूप में कार्य कर चुके थे।

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (2002–2007): उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” और “पीपुल्स प्रेसिडेंट” के नाम से जाना जाता है। वे प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे और भारत के अंतरिक्ष तथा मिसाइल कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल (2007–2012): वे भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं।

प्रणब मुखर्जी (2012–2017): वे एक अनुभवी सांसद और राजनेता थे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने वित्त मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था।

राम नाथ कोविंद (2017–2022): वे भारत के 14वें राष्ट्रपति थे और इससे पहले बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके थे। वे दलित समुदाय से आने वाले भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे।

द्रौपदी मुर्मु (2022–वर्तमान): वे भारत की 15वीं और वर्तमान राष्ट्रपति हैं। वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। वे भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति तथा ओडिशा से राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाली पहली व्यक्ति हैं।

भारत के राष्ट्रपति का संवैधानिक पद

अनुच्छेद 52 भारत में राष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। हालांकि, अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करते हैं।

राष्ट्रपति भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। वे केंद्र सरकार और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के बीच एक औपचारिक संवैधानिक कड़ी के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ

राष्ट्रपति के पास कई महत्वपूर्ण कार्यपालिका शक्तियाँ हैं। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं तथा प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य केंद्रीय मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। राष्ट्रपति राज्यों के राज्यपाल, भारत के महान्यायवादी, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा विभिन्न संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाओं के सदस्यों की नियुक्ति संविधान और संबंधित कानूनों के अनुसार करते हैं।

भारत सरकार की कार्यपालिका संबंधी सभी कार्रवाइयाँ औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के नाम से की जाती हैं। राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति होते हैं। रक्षा संबंधी शक्तियों का प्रयोग भी संविधान और कानूनों के अधीन किया जाता है।

राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का औपचारिक प्रतिनिधित्व भी करते हैं। विदेशी राजनयिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति और उनकी मान्यता तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े कुछ औपचारिक कार्य संविधान एवं कानूनों के अनुसार राष्ट्रपति के माध्यम से किए जाते हैं।

राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ

अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद राष्ट्रपति और दो सदनों—राज्यसभा तथा लोकसभा—से मिलकर बनती है। इसलिए राष्ट्रपति भारतीय संसद का अभिन्न अंग हैं।

राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुला सकते हैं और उनका सत्रावसान कर सकते हैं तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार लोकसभा को भंग कर सकते हैं। राष्ट्रपति आम चुनाव के बाद संसद के पहले सत्र तथा प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हैं।

संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाता है। अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति किसी साधारण विधेयक को एक बार पुनर्विचार के लिए संसद को लौटा सकते हैं। यदि संसद उस विधेयक को दोबारा पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को अपनी स्वीकृति देनी होती है। धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकते।

अनुच्छेद 123 के तहत जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों और तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं। अध्यादेश को संसद के पुनः एकत्र होने के छह सप्ताह के भीतर संसद द्वारा स्वीकृत किया जाना आवश्यक है, अन्यथा वह समाप्त हो जाता है, जब तक कि उससे पहले ही उसे वापस या अस्वीकृत न कर दिया जाए।

अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामित करते हैं। ये सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से होते हैं।

राष्ट्रपति की वित्तीय शक्तियाँ

राष्ट्रपति के पास महत्वपूर्ण वित्तीय शक्तियाँ भी होती हैं। अनुच्छेद 112 के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण, जिसे सामान्यतः केंद्रीय बजट कहा जाता है, राष्ट्रपति की ओर से संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

कुछ वित्तीय विधेयकों को संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक होती है। अनुदानों की मांगों के लिए भी राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक होती है।

अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करते हैं। सामान्यतः वित्त आयोग का गठन प्रत्येक पांच वर्ष में या आवश्यकता होने पर उससे पहले किया जा सकता है। वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण सहित विभिन्न वित्तीय मामलों पर सिफारिश करता है।

राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियाँ

अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को कुछ विशेष मामलों में दंड को क्षमा, लघुकरण, विराम, राहत या माफी देने तथा सजा को निलंबित, कम या परिवर्तित करने की शक्ति प्रदान करता है। यह शक्ति कोर्ट मार्शल से संबंधित मामलों, संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आने वाले अपराधों तथा मृत्युदंड से संबंधित सभी मामलों में लागू होती है।

इसके अलावा, अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के किसी महत्वपूर्ण विधि या तथ्य संबंधी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं।

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियाँ

भारतीय संविधान के भाग XVIII में आपातकालीन प्रावधान दिए गए हैं। राष्ट्रपति को इन प्रावधानों के तहत महत्वपूर्ण संवैधानिक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

राष्ट्रीय आपातकाल – अनुच्छेद 352

अनुच्छेद 352 के तहत युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा को गंभीर खतरा होने पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। इसके लिए संविधान में निर्धारित प्रक्रिया और संसदीय स्वीकृति आवश्यक होती है।

राष्ट्रपति शासन – अनुच्छेद 356

अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र के अनुसार सरकार चलाना संभव नहीं रह जाता है, तो राष्ट्रपति राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। इसे सामान्य रूप से President's Rule कहा जाता है।

वित्तीय आपातकाल – अनुच्छेद 360

अनुच्छेद 360 के तहत यदि भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा उत्पन्न हो, तो वित्तीय आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। इसे संसद की निर्धारित अवधि के भीतर स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है।

भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा सीधे नहीं किया जाता है। राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भी संविधान के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।

राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा और गुप्त मतदान से किया जाता है।

राष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। राष्ट्रपति पुनः निर्वाचित हो सकते हैं और संविधान राष्ट्रपति के कार्यकालों की संख्या पर कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं करता है।

भारत के राष्ट्रपति का महत्व

भारत के राष्ट्रपति भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में संसदीय शासन प्रणाली होने के कारण वास्तविक कार्यपालिका शक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद के माध्यम से प्रयोग की जाती है, लेकिन राष्ट्रपति कई महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्यों का निर्वहन करते हैं।

राष्ट्रपति संवैधानिक पदों पर नियुक्तियाँ करने, संसद का सत्र बुलाने, विधेयकों पर स्वीकृति देने, अध्यादेश जारी करने, क्षमादान की शक्ति का प्रयोग करने और संवैधानिक आपातकाल से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्य करने जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाते हैं। इस प्रकार राष्ट्रपति भारतीय संविधान, लोकतंत्र और संघीय शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति कौन हैं?
द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं और वर्तमान राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद ग्रहण किया।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे।

भारत की पहली महिला राष्ट्रपति कौन थीं?
प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं।

भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति कौन हैं?
द्रौपदी मुर्मु भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।

भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
भारत के राष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

भारत के राष्ट्रपति का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
अनुच्छेद 52 भारत में राष्ट्रपति के पद का प्रावधान करता है। राष्ट्रपति से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान अनुच्छेद 52 से 62 तक दिए गए हैं।

राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है?
राष्ट्रपति को क्षमादान आदि की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत प्राप्त है।

राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 123 में दी गई है।

राष्ट्रीय आपातकाल किस अनुच्छेद के तहत लगाया जाता है?
राष्ट्रीय आपातकाल का प्रावधान अनुच्छेद 352 में है।

राष्ट्रपति शासन किस अनुच्छेद के तहत लगाया जाता है?
राष्ट्रपति शासन का प्रावधान अनुच्छेद 356 में है।

वित्तीय आपातकाल किस अनुच्छेद के तहत लगाया जाता है?
वित्तीय आपातकाल का प्रावधान अनुच्छेद 360 में है।

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