SEMICON India 2026: भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, महत्व और प्रमुख विकास
परिचय
SEMICON India 2026 भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमताओं और एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयासों को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इस आयोजन में सेमीकंडक्टर कंपनियों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, निवेशकों और अन्य हितधारकों ने चिप डिजाइन, विनिर्माण, पैकेजिंग, नवाचार और कौशल विकास से जुड़े अवसरों पर चर्चा की।
SEMICON India 2026 का उद्घाटन यशोभूमि, द्वारका, नई दिल्ली में किया गया। इस संस्करण की थीम “Silicon to Systems: Building the Ecosystem” थी। यह थीम भारत के उस व्यापक लक्ष्य को दर्शाती है, जिसके तहत देश केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली तक सीमित न रहकर सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों में अपनी क्षमताओं को विकसित करना चाहता है।
सेमीकंडक्टर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सेमीकंडक्टर लगभग हर आधुनिक डिजिटल और औद्योगिक तकनीक का आधार हैं। इनका उपयोग ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, एयरोस्पेस, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स में बेहद छोटे क्षेत्र में अरबों ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं। उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक तेज कंप्यूटिंग, ऊर्जा दक्षता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जटिल डिजिटल अनुप्रयोगों को सक्षम बनाती है।
सेमीकंडक्टर का महत्व केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इनकी आपूर्ति में व्यवधान कई उद्योगों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति में आई बाधाओं ने कुछ सीमित विनिर्माण केंद्रों पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया।
इसी कारण दुनिया के कई देश घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और अधिक मजबूत एवं विविध आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर ध्यान दे रहे हैं।
SEMICON India 2026 क्या है?
SEMICON India भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर केंद्रित एक प्रमुख सम्मेलन और प्रदर्शनी है। इसका पहला संस्करण 2022 में बेंगलुरु में आयोजित किया गया था और 2026 का संस्करण इसका पाँचवाँ संस्करण है।
SEMICON India 2026 में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जिनमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर डिजाइन
- चिप निर्माण और फैब्रिकेशन
- असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग
- सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं नवाचार
- प्रतिभा और कौशल विकास
- उन्नत विनिर्माण
- वैश्विक तकनीकी साझेदारी
यह आयोजन भारत को अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को प्रदर्शित करने और वैश्विक कंपनियों एवं तकनीकी हितधारकों के साथ सहयोग बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
भारत का बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा को देश के तेजी से विस्तार करते इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र से भी समर्थन मिल रहा है। पिछले एक दशक में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014–15 में लगभग ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹13.11 लाख करोड़ हो गया।
इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹4.24 लाख करोड़ हो गया।
मोबाइल फोन विनिर्माण में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। मोबाइल फोन उत्पादन 2014–15 में लगभग ₹18,000 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में स्मार्टफोन निर्यात लगभग ₹1,500 करोड़ से बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़ हो गया।
इस विस्तार ने भारत को मोबाइल फोन के एक प्रमुख घरेलू विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने में योगदान दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार से रोजगार के अवसरों और औद्योगिक कौशल में भी वृद्धि हुई है, जिससे अधिक उन्नत प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए आधार तैयार हुआ है।
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को 2021 में ₹76,000 करोड़ के प्रारंभिक वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना है। इसके अंतर्गत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों को समर्थन देने पर ध्यान दिया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर डिजाइन
- सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन
- असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग
- सेमीकंडक्टर उपकरण
- आवश्यक सामग्री
- अनुसंधान एवं विकास
- कुशल मानव संसाधन का विकास
इस कार्यक्रम का दृष्टिकोण केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन से लेकर विनिर्माण और उन्नत पैकेजिंग तक एकीकृत इकोसिस्टम विकसित करने पर आधारित है।
सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0
जुलाई 2026 में सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम 2.0 को मंजूरी दी। इसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बढ़ा हुआ वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता को तेज करना और वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता बताई गई है।
इन परियोजनाओं में विभिन्न प्रकार की क्षमताएँ शामिल हैं, जैसे:
- सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब
- कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण
- डिस्प्ले फैब्रिकेशन
- उन्नत सेमीकंडक्टर पैकेजिंग
ये पहल भारत में सेमीकंडक्टर नीति से वास्तविक विनिर्माण क्षमता की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती हैं।
भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम का विकास
एक मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए केवल विनिर्माण संयंत्र पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और चिप डिजाइनरों की भी आवश्यकता होती है।
इसी उद्देश्य से भारत ने Chips to Startup (C2S) Programme और Design Linked Incentive (DLI) Scheme जैसी पहलों के माध्यम से सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दिया है।
C2S Programme के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों को सेमीकंडक्टर डिजाइन से संबंधित बुनियादी ढाँचे, प्रशिक्षण सुविधाओं और Electronic Design Automation (EDA) टूल्स तक पहुँच उपलब्ध कराई जाती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, EDA टूल्स को 320 शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचाया गया है, जिससे 68,000 से अधिक विद्यार्थियों को उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन तकनीकों का अनुभव प्राप्त हुआ है।
इन पहलों के अंतर्गत चिप डिजाइन परियोजनाओं और स्टार्टअप्स को भी समर्थन दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिली है, जबकि 105 स्टार्टअप और MSMEs को DLI योजना के तहत EDA टूल्स का समर्थन मिला है।
स्वदेशी चिप डिजाइन में प्रगति
भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम में स्वदेशी चिप डिजाइन और परीक्षण की गतिविधियों में भी विस्तार हुआ है।
अप्रैल 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 75 संस्थानों द्वारा 211 चिप्स को टेप-आउट किया गया था। टेप-आउट चिप डिजाइन प्रक्रिया का वह चरण है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देकर विनिर्माण के लिए तैयार किया जाता है।
इनमें से सात चिप्स का विभिन्न तकनीकी नोड्स पर निर्माण किया जा चुका था, जिसमें 12 नैनोमीटर तक के उन्नत नोड भी शामिल हैं।
यह प्रगति चिप डिजाइन से वास्तविक सेमीकंडक्टर विनिर्माण की दिशा में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
ChipIN Centre
C-DAC में ChipIN Centre की स्थापना उन्नत सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स, फैब्रिकेशन सेवाओं और विशेष प्रशिक्षण तक साझा पहुँच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।
यह केंद्र उन संस्थानों, स्टार्टअप्स और इंजीनियरों के लिए उपयोगी है, जिन्हें सेमीकंडक्टर विकास के लिए आवश्यक महंगे उपकरणों और बुनियादी ढाँचे तक स्वतंत्र रूप से पहुँच प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ChipIN से संबंधित पहलों के माध्यम से 500 से अधिक संगठनों के 1 लाख से अधिक इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर डिजाइन सहायता उपलब्ध कराई गई है। इनमें लगभग 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं।
समर्थित संस्थानों ने 300 से अधिक चिप डिजाइन भी विकसित किए हैं, जिन्हें Semiconductor Laboratory (SCL), मोहाली और उन्नत वैश्विक फाउंड्री जैसी सुविधाओं में निर्माण के लिए तैयार किया गया है।
साझा बुनियादी ढाँचा महंगे डिजाइन टूल्स तक पहुँच की लागत और बाधाओं को कम करने तथा सेमीकंडक्टर नवाचार को गति देने में मदद कर सकता है।
भारत और वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला
सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें कच्चे माल, विशेष उपकरण, चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और उन्नत कंप्यूटिंग अवसंरचना जैसे कई चरण शामिल होते हैं।
इसी कारण भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण है।
भारत की Pax Silica coalition में भागीदारी का उद्देश्य वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के लिए सहयोग बढ़ाना है। यह पहल व्यापक “silicon stack” से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती है, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और संबंधित बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने से कुछ सीमित स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तकनीकों तक सुरक्षित पहुँच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत को सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की आवश्यकता क्यों है?
एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने से भारत को कई आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं।
तकनीकी क्षमता
घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल और रक्षा तकनीकों में भारत की क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है।
आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती
घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ने से वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों के प्रति भारत की संवेदनशीलता कम हो सकती है।
आर्थिक विकास
सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन और पैकेजिंग में निवेश से रोजगार, औद्योगिक विकास और उच्च-मूल्य विनिर्माण को बढ़ावा मिल सकता है।
स्टार्टअप और नवाचार
डिजाइन टूल्स, फैब्रिकेशन सुविधाओं और अनुसंधान अवसंरचना तक बेहतर पहुँच से भारतीय स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को चिप विकास में भाग लेने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।
रणनीतिक तकनीकी क्षमता
सेमीकंडक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संचार, उन्नत कंप्यूटिंग और रक्षा प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए घरेलू क्षमता विकसित करना भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
आगे की चुनौतियाँ
महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना एक जटिल और दीर्घकालीन प्रक्रिया है।
भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में निरंतर निवेश और क्षमता विकास की आवश्यकता होगी:
- उन्नत फैब्रिकेशन तकनीक
- सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं विकास
- कुशल मानव संसाधन
- विश्वसनीय बिजली और जल आपूर्ति
- सेमीकंडक्टर-ग्रेड सामग्री
- आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण
- उन्नत पैकेजिंग
- वैश्विक तकनीकी साझेदारी
सेमीकंडक्टर उद्योग अत्यधिक पूंजी-गहन और तकनीकी रूप से जटिल है। इसलिए दीर्घकालीन निवेश, निरंतर नवाचार और सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक होगा।
निष्कर्ष
SEMICON India 2026 भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आधार से एक व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की ओर बढ़ने के प्रयासों को दर्शाता है।
सरकारी कार्यक्रमों, सेमीकंडक्टर परियोजनाओं, चिप डिजाइन पहलों, कौशल विकास कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विभिन्न चरणों में अपनी क्षमताओं को विकसित कर रहा है।
भारत का दीर्घकालीन लक्ष्य केवल सेमीकंडक्टर चिप्स का विनिर्माण करना नहीं है, बल्कि चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना भी है।
एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, उच्च-मूल्य विनिर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- SEMICON India 2026: आयोजन का पाँचवाँ संस्करण।
- पहला SEMICON India: 2022, बेंगलुरु।
- 2026 की थीम: “Silicon to Systems: Building the Ecosystem”
- Semicon India Programme: 2021 में शुरू किया गया।
- प्रारंभिक वित्तीय परिव्यय: ₹76,000 करोड़।
- Semicon India Programme 2.0: जुलाई 2026 में मंजूर।
- Semicon 2.0 का परिव्यय: ₹1,27,500 करोड़।
- स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ: छह राज्यों में 12 परियोजनाएँ।
- निवेश प्रतिबद्धता: ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक।
- C2S: Chips to Startup Programme।
- DLI: Design Linked Incentive Scheme।
- EDA: Electronic Design Automation।
- ChipIN Centre: C-DAC में सेमीकंडक्टर डिजाइन और प्रशिक्षण सुविधा।
- Pax Silica: सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से जुड़ी पहल।